चेन्नई सुपर किंग्स के लिए आईपीएल 2025 का सीजन भूलने लायक रहा। 14 मैचों में सिर्फ 4 जीत, लगातार पांच और फिर लगातार चार मैचों की हार—यह वो आंकड़े हैं जो इस फ्रेंचाइजी के इतिहास में शायद ही कभी देखने को मिले हों। लेकिन जैसा कि अक्सर होता है, चेन्नई ने सबसे बड़े संकट के समय सबसे बड़ा बदलाव किया है।
आईपीएल 2026 में सीएसके बिल्कुल नई नजर आएगी। नया कप्तान, नया विकेटकीपर-बल्लेबाज, और सबसे बड़ी बात—नई सोच। टीम ने वो रास्ता चुना है जो उसने शायद ही कभी चुना हो: युवा प्रतिभाओं पर भरोसा, बड़े बदलाव, और पुराने चेहरों को अलविदा। सवाल है—क्या यह नई फिलॉसफी उन्हें पुरानी सफलता की ओर ले जाएगी?
2008 की याद: संजू सैमसन और धोनी की समानांतर कहानी
2008 में जब सीएसके ने एक युवा विकेटकीपर-बल्लेबाज को टीम में शामिल किया, तो शायद ही किसी ने सोचा था कि वो इस फ्रेंचाइजी की पहचान बन जाएगा। एमएस धोनी का आना सीएसके के लिए एक टर्निंग पॉइंट था।
आईपीएल 2026 में इतिहास खुद को दोहराता दिख रहा है। संजू सैमसन, जो अभी-अभी टी20 वर्ल्ड कप में प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट रहे हैं, अब चेन्नई की नई पोशाक में नजर आएंगे। राजस्थान रॉयल्स से यह आगमन सिर्फ एक खिलाड़ी का नहीं, बल्कि एक नई क्रिकेटिंग पहचान का है। धोनी ने 2008 में जो किया, सैमसन से 2026 में उसी की उम्मीद है—टीम को नई दिशा देना, मैदान पर और मैदान के बाहर।
युवाओं पर दांव: 14 करोड़ के दो नायक
सीएसके ने हमेशा अनुभवी खिलाड़ियों की टीम के रूप में पहचान बनाई थी। लेकिन इस बार उन्होंने एक ऐसा कदम उठाया है जिसे उनके अपने फैंस ने शायद ही पहले देखा हो। प्रशांत वीर और कार्तिक शर्मा—दो युवा खिलाड़ी जिन्होंने अब तक मिलकर सिर्फ 21 टी20 मैच खेले हैं—को 14.2-14.2 करोड़ रुपये में खरीदा गया।
यह सिर्फ नीलामी की बड़ी बोली नहीं है। यह सोच में बदलाव है। पिछले सीजन के बीच में ही सीएसके ने अयुष म्हात्रे (अंडर-19 वर्ल्ड कप जीतने वाली टीम के कप्तान) और डेवाल्ड ब्रेविस को टीम में शामिल करना शुरू कर दिया था। अब यह बदलाव पूरी तरह से दिख रहा है। अनुभवी मिशेल सेंटनर जैसे खिलाड़ी बेंच पर बैठते थे, अब 19-20 साल के युवा सीधे प्लेइंग इलेवन में उतरेंगे।
संभावित प्लेइंग इलेवन: कैसा दिख सकता है सीएसके का XI?
- संजू सैमसन
- अयुष म्हात्रे
- ऋतुराज गायकवाड़ (कप्तान)
- शिवम दुबे
- डेवाल्ड ब्रेविस*
- कार्तिक शर्मा/सरफराज खान
- प्रशांत वीर
- एमएस धोनी (विकेटकीपर)
- जेमी ओवरटन*/रामकृष्ण घोष
- नूर अहमद*
- मैट हेनरी/अकील हुसैन*
- खलील अहमद
*विदेशी खिलाड़ी
सबसे बड़ी चुनौती: गेंदबाजी का नया समीकरण
सीएसके ने इस बार अपने गेंदबाजी विभाग में सबसे बड़ा बदलाव किया है। रवींद्र जडेजा और सैम करन को राजस्थान रॉयल्स को भेजकर संजू सैमसन को लाया गया। यानी, टीम ने अपने दो प्रमुख ऑलराउंडरों को खोया है।
प्रशांत वीर को जडेजा की कमी को पूरा करना है। वीर में एक खासियत है जो जडेजा शायद ही करते थे—पॉवरप्ले में बाएं हाथ की स्पिन गेंदबाजी। लेकिन यहां एक बड़ा सवाल है: वीर ने यह क्षमता यूपी टी20 लीग में दिखाई है, लेकिन आईपीएल का स्तर बिल्कुल अलग है।
डेथ ओवरों की गेंदबाजी सीएसके के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय है। मथीशा पथिराना को छोड़ने के बाद, टीम ने नूर अहमद पर भरोसा जताया है। लेकिन क्या नूर अहमद डेथ ओवरों में उतने ही प्रभावी होंगे? नाथन एलिस की चोट ने यह चुनौती और बढ़ा दी है। एलिस वो गेंदबाज थे जिनसे 17 से 20वें ओवर करवाने की योजना थी।
आंकड़ों से समझें सीएसके की जरूरतें
पिछले सीजन के आंकड़े बताते हैं कि सीएसके को सबसे ज्यादा कहां सुधार की जरूरत है:
- पॉवरप्ले में संघर्ष: सीएसके का पॉवरप्ले में रन रेट (8.7) और औसत (25.2) दोनों ही सभी टीमों में सबसे खराब थे। संजू सैमसन का आना इस समस्या का सबसे बड़ा हल हो सकता है। वो ऑफ साइड और लेग साइड, दोनों तरफ खुलकर खेल सकते हैं।
- शिवम दुबे का फॉर्म: 2022 से 2024 तक दुबे का स्ट्राइक रेट 156, 158, 162 रहा, लेकिन 2025 में यह गिरकर 132 पर आ गया। वजह थी टॉप ऑर्डर की अनियमितता, जिससे दुबे को लंबी पारी खेलनी पड़ी। अगर सैमसन शीर्ष क्रम को स्थिरता देते हैं, तो दुबे फिर से अपनी हाई-इम्पैक्ट भूमिका में लौट सकते हैं।
- धोनी की भूमिका: 2023 में धोनी का स्ट्राइक रेट 182 था, 2024 में 221। लेकिन पिछले साल उन्हें 145 गेंदें खेलनी पड़ीं (2023 और 2024 के कुल मिलाकर 130 गेंदें थीं), और स्ट्राइक रेट गिरकर 135 पर आ गया। सीएसके चाहेगी कि टॉप-5 इतना अच्छा सेट करें कि धोनी फिर से अपनी पुरानी भूमिका में लौट सकें—10-12 गेंदें, हर गेंद पर छक्का लगाने की कोशिश।
बड़ा सवाल: क्या यह धोनी का आखिरी सीजन होगा?
यह सवाल पिछले कुछ सीजन से हर बार पूछा जा रहा है। लेकिन इस बार इसके पीछे की परिस्थितियां अलग हैं। एक नया कप्तान है (ऋतुराज गायकवाड़), एक नया विकेटकीपर है (संजू सैमसन), और टीम ने एक नई दिशा चुनी है। यह सब मिलाकर संकेत देता है कि सीएसके धीरे-धीरे धोनी के बाद के भविष्य की तैयारी कर रही है।
धोनी इस सीजन में भी टीम का हिस्सा होंगे, लेकिन उनकी भूमिका संभवतः पिछले सीजन से अलग होगी—अधिक केंद्रित, कम गेंदें, अधिक प्रभाव। और यही वो फॉर्मूला है जिसमें वो सबसे खतरनाक रहे हैं।
निष्कर्ष: पुरानी सफलता के लिए नई राह
सीएसके ने इस बार एक जोखिम उठाया है। उन्होंने अपनी पुरानी पहचान—अनुभवी, स्थिर, धीमी शुरुआत और तेज अंत—को बदलने का फैसला किया है। नई टीम में युवा हैं, तेजी है, और शायद कच्चापन भी।
लेकिन यह वही फ्रेंचाइजी है जिसने 2008 में एक युवा विकेटकीपर पर भरोसा जताकर इतिहास रचा था। अब 2026 में, एक और विकेटकीपर-बल्लेबाज के आगमन के साथ, वो इतिहास दोहराने की कोशिश कर रही है। यह नई फिलॉसफी उन्हें पुरानी सफलता की ओर ले जाएगी या नहीं, यह तो समय बताएगा। लेकिन इतना तय है—यह सीएसके पहले जैसी नहीं है।







